Event Date/Time: Mar 22, 2009 End Date/Time: Mar 31, 2009
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Description

government college bundi
WORKSHOP on
Ashtadhyaykramen vyakaranadhyayanm samadhaviyadhatuvritti
22 -31 march 2ian009
convener
sayanarayan pratihar
lecturer sanskrit department,
gargian
Devendra kumar agrawal
Principal
government college bundi

sponsored by
regional office
university grant commission bhopal

All sanskrit profesher/ teacher are invited to praticipate respectively in this workshop for promotion of sanskrit grammer .Using complete time, objective will be acheived.
TA & DA will be given according rules to young teacher below 45 . Please travel by 2nd class fare. Participant will manage food with our full support. Commissioner has
been given acceptance for academic leave for rajasthan -prticipant and dak banglow and cercit house remain vacant all year.

Devendra kumar agrawal
Principal
government college bundi
convener
sayanarayan pratihar
lecturer sanskrit department,
government college bundi(rajasthan) INDIA

Fax & tel. 07472445628
mobile no.9351556897
राजकीय महाविद्यालय बून्दी
अष्टाध्यायीक्रमेण व्याकरणाध्ययनं समाधवीयधातुवृत्ति इतिविषयमधिकृत्य आयोज्यमानकार्यशाला
2009तमे मार्चमासस्य द्वादशतिथेः आरभ्य एकत्रिंशतिथिं यावत्
संयोजकः
सत्यनारायणः प्रतिहारः
व्याख्याता संस्कृत विभागः
संरक्षकः
देवेन्द्रः कुमारः अग्रवालः
प्राचार्यः
राजकीय महाविद्यालय बून्दी
प्रयोजकः
विश्वविद्यालयानुदानायोगः ,क्षेत्रियकार्यालयः भोपालनगरम्
आमन्त्रणपत्रम्
राजकीय महाविद्यालय बून्दी द्वारा दिनांक 22 मार्च से 31 मार्च 2009 तक "अष्टाध्यायीक्रमेण व्याकरणाध्ययनं समाधवीयधातुवृत्ति" विषय पर आयोजित कार्यशाला में भाग लेने हेतु आप या आपके विभाग/कॉलेज के संस्कृतव्याख्याता सादर आमन्त्रित हैं । पूर्ण समय का उपयोग करते हुए उद्देश्य प्राप्त किया जायेगा । पत्रवाचन हेतु आये 45 वर्ष से कम आयु वाले प्रोफेसर या व्याख्याताओं को नियमानुसार यात्राभत्ता देय है । रेलयात्री को द्वितीयश्रेणी का किराया देय होगा । राजस्थान के सहभागी डाक बंगले, विश्रान्तिगृह में टहरेंगे, स्थान उपलब्ध न होने पर धानमण्डी धर्मशाला व होटलों में ठहरेंगे । भोजन की व्यवस्था कॉलेज की सहायता से सहभागियों द्वारा की जायेगी । अथवा मुफ्त भोजन और आवास के बदले दैनिक भत्ता काट लिया जायेगा।
केन भागः ग्रहणीयः
विश्वविद्यालयानुदानायोग द्वारा मान्य विश्वविद्यालयों या कालेजो के प्रोफेसर व व्याखायाता जो व्याकरण में पारङ्गत होकर अनुसंधान करना या संस्कृत की उन्नति करना चाहते हैं । जो भविष्य में व्याकरणाध्ययन में तत्पर रहेंगे।
आयोजन का कारण
पर्याप्त श्रम करने पर भी व्याकरण में पारङ्गत न होना, पाठ्यक्रम की विसंगतियों से अध्यापन से अधूरा ज्ञान, प्राचीन पद्धति से लाभान्वित होकर अष्टाध्यायी तथा माधवीयधातुवृत्ति के प्रचार की इच्छा, स्वानुभूत अध्ययनविधि का प्रचार ।
कार्यशाला का उद्देश्य
आधुनिक प्रणाली से ही पढाने के कारण संस्कृतव्याकरण बहुत पिछड गयी है । हम पाणिनि की अष्टाध्यायी को भूल गये हैं । पाणिनि ने वैज्ञानिक तरीके से सश्रम इसको लिखा था । उनका आशय था कि हम सूत्रों क्रमशः पढें तथा याद रखें । कम शब्दों में व्यवस्थित क्रम से लिखा व्याकरण अवश्य ही याद रखा जा सकता है । सूत्रों में ही सूत्रार्थविधि भी बतायी गयी है । अतः उस विधि को अच्छी तरह समझकर कोई भी आसानी से सूत्रों का अर्थ भी तत्काल ही जान सकता है । इसके बाद थोडा अभ्यास करके वह व्याकरण में पारङ्गत भी हो सकता है । यदि फिर भी समस्या आती है तो तो काशिका आदि वृत्तियाँ मदद करती हैं । इसी तरह धातुपाठ का अध्ययन भी वैज्ञानिक तरीके से अपेक्षित है । वहाँ भी समस्या आने पर माधवीयधातुवृत्ति समाधान हेतु विद्यमान है। परन्तु लघुसिद्धान्तकौमुदी द्वारा ही पठनपाठन होने से संस्कृत व्याख्याताओं द्वारा इनका दर्शन तक नहीं होता , अध्ययन का क्या कहना । फलस्वरूप संस्कृत पिछड गयी है। मैंने अष्टाध्यायी काशिका व माधवीयधातुवृत्ति का उल्लेख किया है । कार्यशाला द्वारा परम्परागतप्रणाली (अष्टाध्यायी काशिका व माधवीयधातुवृत्ति ) का माहात्म्य प्रतिपादित करना या उद्घोषित करना अपेक्षित है ।अष्टाधायायी की सूत्रार्थविधि प्रकाशित कर पठनपाठन हेतु व्याख्याताओं को को प्रेरित करना , अध्यापनगत कठिनता तथा समस्या का निवारण करना है। इस कार्य में काशिका की सहायता लेकर उसके महत्त्व को प्रख्यापित करना तथा उसके अध्ययन में आती मुश्किलों का निवारण करना है । धातुपाठ की विधि बतलाकर माधवीयधीतुवृत्ति की सहायता से संक्षेप में ही धातुरूप सिखाना है । इस कार्य के लिए पुस्तकों की भूमिका में ही पर्याप्त सामग्री विद्यमान है । उसी का अनुसंधान कर प्रकाशन किया जाना है । विल्कुल ही नवीन ज्ञान खोजना असंभव है क्योंकि वैयाकरणों ने किसी भी सूक्ष्मविषय को अछूता नहीं छोडा है । हमारा कार्य केवल इंगित करना है तथा प्रचार करना या अनुवादमात्र है । माधवीयधातुवृत्ति में सूक्ष्म विवेचन भी किया गया है । उस पर भी ध्यान केन्द्रित होगा । इसमें रूपसिदधि व शब्दव्युत्पत्ति भी है जिसके अध्ययन से हमारे ज्ञान में और वृद्धि होगी ।
संक्षेपतः कार्यशाला का प्रयोजन व्याकरण को पाणिनिसम्मतविधि से पढने की उत्प्रेरणा द्वारा विषमीकृत विषय को पुनः सुगम तथा सुबोध बनाकर
संस्कृत का उद्धार करना है ।
शोधपत्रवाचन व पूर्वप्रकाशन
सहभागी अष्टाध्यायी व माधवीयधातुवृत्ति के किसी उपयोगी प्रकरण या भाग का अध्ययन कर पत्रवाचन करेंगे । वे 20 मार्च से पूर्व शोधपत्र का सार कार्यशाला से पूर्व छापने हेतु
krutidev font /sanskrit 2003 में Email से या
CD द्वारा प्रषित करें।
कार्यक्रम
दिनांक प्रथमसत्र 10-11.40 द्वितीयसत्र 12-1.30 तृतीयसत्र 2.00 से 3.30,चतुर्थसत्र 3.40 -5.00 बजे
22मार्च पंजीकरण व उद्घाटन सूत्रार्थविधि अष्टाध्यायी -संज्ञाप्रकरण परिभाषासूत्र पत्रवाचन, प्रश्नोत्तर
23 कृत प्रत्यय सुप् अनुबन्ध विचार पत्रवाचन, प्रश्नोत्तर
24 तिङ्, ङित्, कित् प्रत्यय षष्ठ-अध्याय-प्रथमतृतीयपाद पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
25 अङाधिकार अङाधिकार अङाधिकार पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
26 8वाँ अध्याय-2-3-4 धातुपाठविधि माधवीयधातुवृत्ति -परिचय पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
27 भ्वादिगण अदादि दिवादि पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
28 जुहोत्यादि शब्दरूपसिद्धि धातुरूपसिद्धि पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
29 तुदादि,तनादि धातुरूपसिद्धि अभ्यास क्र्यादि,स्वादि पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
30 रुधादि धातुरूपसिद्धि अभ्यास धातुरूपसिद्धि अभ्यास पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर
31 धातुरूपसिद्धि अभ्यास शब्दरूपसिद्धि अभ्यास पत्रवाचन,प्रश्नोत्तर समापन समारोह
नोटःपरीक्षानुकूल परिवर्तन किया जायेगा।


संयोजक प्राचार्य
सत्यनारायण प्रतिहार राजकीय महाविद्यालय बून्दी
व्याख्याता, संस्कृत विभागः
दूरभाष 0747-2445628
मोबाइल नं. 9351556897
Email- satya_prati@rediffmail.com

Venue

kota road
bundi
rajasthan
India
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Additional Information

registration fees:-- 300 rupees.

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